क़ुरबानी के दिन (qurbani ke 3 din ya 4 din)

 

क़ुरबानी के दिन - qurbani ke kitne din hai in hindi 

(qurbani ke 3 din ya 4 din)

 

qurbani ke kitne din he in hindi  , क़ुरबानी के कितने दिन हे , qurbani ke 3 din ya 4 din, क़ुरबानी के 3 दिन या 4 दिन   

हमारे यहाँ कही तरह के मसलक हे और उन में कुछ कुछ इख्तिलाफ होता हे 

उन में से ही एक इख्तिलाफ ये हे के कुर्बानी के 3 दिन हे या 4 दिन तो आइये हम दलील की बुनियाद पर फेसला करते हैं

 



4 दिन क़ुरबानी करने वालो की दलील 

क़ुरबानी ईद के बाद तीन दिन तक की जा सकती हैं ईद 10 जिल्हिज्ज़ा को होती हैं इस के बाद तीन दिनों को अय्याम ए तशरीह कहते है अय्याम इ तशरीह को जिबह के दिन करार दिया गया है चुनांचा हजरत जुबैर इब्ने मुतिम रदिअल्लहु अन्हु से रिवायत हे के नबी   صلاله عليه وسلم ने इरसाद फरमाया :" तमाम अययन ए तशरीह जिबह के दिन हैं " ( मुसनद अहमद 4/82 हदीस न. 16752)

 

जवाब:- 

रिवायत न. (i) : मुसनद अहमद 4/82 हदीस न. 16752 की ये अह्दीस उसूले मोद्दीसीन पर जहीफ है

सुलेमान बिन मूसा ने स्स्य्येदना जुबैर बिन मुतीम रदिअल्लहु अन्हु को नहीं पाया | इमाम बहकी ने इस रिवायत के बारे में फ़रमाया "مرسال" यानी मुन्कते है |

(सुनन अल कुबरा जिल्द 5 सफ्ह 239, जिल्द 9 सफ्ह 295) 

 

इमाम तिरमिज़ी की तरफ मंसूब किताब अलूल अल कबीर  में इमाम बुखारी से रिवायत हे के उन्होंने फ़रमाया : "सुलेमान (बिन मूसा ) ने नबी صلاله عليه وسلم के साहबा में से किसी को भी नहीं पाया |"

(अलूल अल कबीर 1/313)

 

इस की ताइद इस से भी होती हे के किसी सही दलील से ये बात साबित नहीं हैं के सुलेमान बिन मूसा ने स्य्येदना जुबैर रदिअल्लहु अन्हु को पाया है  | 

 

रिवायत न. (ii) : इसके अलावा और जितनी  अह्दीस इस सिल्सिसले में आती हे जेसे अल बहकी , सही इब्ने हिब्बान ( अल अहसान : 3843 ,  दूसरा नुस्वखा  3854)  , ( सुनन अल बहकी 9/ 295, 296)में सुलेमान बिन मूसा की सनद से मरवी हे के सारे अय्याम ए तशरीह में जिबह है ये रिवायत दो वजह से जइफ हे 

1. हाफिज अल बिजार ने कहा इब्ने अबी हुसैन की जुबैर बिन मुतीम  से मुलाकात नहीं हुई 

( अल बहर अल जिखार  8/364 3444)  .

 

2. अब्दुल रहमान बिन हुसैन की तोशीक हिब्बान (अल सकात 5/109) के अलावा किसी और से साबित  नहीं हे लिहाजा ये रावी मजहूल रावी हे 

 

रिवायत न. (iii) : तबरानी  (अल म्ज्मुम अल कबीर 2/138 1583 ) बेजार (अल बहर जिखार 8/363 3443)  बहकी (अल सुन्न अल कुबरा 5/239 9/292) और  दार्कुतनी (अल सुन्न 4/284 4711)  में हे के "तमाम अय्याम तशरीह में जिबह हे " इस रिवायत का बुनियादी रावी सोहीद बिन अब्दुल अजीज जईफ हे | (देखीय तकरीब उल तहजीब : 2692)

 और जितनी मभी इस सिलसिले में अह्दीस रिवायत की गई हे वो सब की सब अह्दीस ए मोह्द्दीसीन पर जईफ हे

 

3 दिन कुर्बानी के दलील 

रिवायत मसूला के जईफ होने के बाद आसरे शब की तहकीक दर्ज जेल हे 

 

1. स्य्येदना अब्दुल्ला बिन अब्बास रदिअल्लहु अन्ह ने फ़रमाया " क़ुरबानी वाले दिन के बाद (मजीद ) दो दिन क़ुरबानी (होती) हे |
(
मोताए इमाम मालिक जिल्द 2 1071 और सनद सही , अल सुन्न अल कुबरा अल बहकी 9/297)

 

2. स्य्येदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदिअल्लहु अन्हु ने फ़रमाया " क़ुरबानी के दिन के बाद दो दिन क़ुरबानी हे और अफज़ल क़ुरबानी नहर वाले (पहले ) दिन हे | (अह्कमुल कुरान अल्तावी 2/205 1571 सनद हसन )

 

3. स्य्येदना अनस बिन मालिक रदिअल्लहु अन्हु ने फ़रमाया " क़ुरबानी वाले दिन के बाद दो दिन क़ुरबानी होती हे " (अह्कमुल कुरान अल्तावी 2/206 569 सनद सही )

 

4. स्य्येदना अली  रदिअल्लहु अन्हु  ने फ़रमाया " क़ुरबानी के तीन दिन हैं " (अहकाम उल कुरान अल्तावी 2/205 569 सनद  हसन) 

 

 

 

अहकाम उल कुरान में हे जेसा के कतीब इस्माइल र जाल से जाहिर हे और हम्माद से मुराद हम्माद बिन सुलेम हे ول حمدو لله

 

 

उन के मुकाबले में चन्द आसार दर्ज जेल हे 

 

1. हसन बसरी ने कहा " ईद उल अज़ह के दिन के बाद तीन दिन क़ुरबानी हे | (अहकाम उल कुरान अल्तावी 2/206 1577 सनद सही , अल सुन्न अल कुबरा बहकी 9/297 सनद सही )

 

2. अता बिन अबी रहब ने कहा " अय्याम ए तशरीक के आखिर तक (क़ुरबानी हे ) (अहकाम उल कुरान अल्तावी 2/206 1578 सनद हसन ,अल सुन्न अल कुबरा बहकी 9/296 सनद हसन)

 

3. उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने फ़रमाया " क़ुरबानी के दिन के बाद तीन दिन हे | (अल सुन्न अल कुबरा बहकी 9/297सनद हसन)

 

इमाम शाफी और आम अहले हदीस उलमा का यही फतवा हे के क़ुरबानी के चार दिन हे | बाज उलमा इस सिलसिले में स्य्येदना जुबैर बिन मुतिम रदिअल्लहु अन्हु की तरफ मनसूब रिवायत से भी इस्तिदलाल करते हे लेकिन रिवायत जईफ हे जेसा के ऊपर तफसील से साबित क्र दिया गया हे 

 

4. स्य्येदना अबू इमाम बिन सुहेल बिन हनीफ  रदिअल्लहु अन्हु से रिवायत हे के मुसलमान अपनी क़ुरबानीयां खरीदते फिर उन्हें खिला खिला क्र मोटा करते फिर ईद उल अजह  के बाद आखरी जुल हिज्जा तक को जिब्ह करते (अल सुन्न अल कुबरा बहकी 9/297 ,298 सनद सही )

 

 

इन सब आसार से स्य्येदना अली बिन अबी तालिब रदिअल्लहु अन्हु  वगेरा राझे हे के क़ुरबानी तीन दिन हे: ईद उल अज्ह और दो दिन बाद |


इब्ने अजम ने इब्ने अबी शीयाबा से नकल किया हे के " स्य्येदना अबू हुर्रेरा  रदिअल्लहु अन्हु ने फ़रमाया के क़ुरबानी तीन दिन हे (अल महोला   जिल्द 7 377 मसला : 982) इस रिवायत की सनद हसन हे लेकिन मुसनंफ इब्ने अबी शीयाबा में ये रिवायत नहीं मिली|    वल्लाहु आलम 

 

 

निष्कर्ष:- 

 

नबी صلاله عليه وسلم ने इप्तिदा में तीन दिन से ज्यादा क़ुरबानी का गोस्त रखने से मना फ़रमाया था बाद में ये हुक्म मंसूख हो गया | ये म्मनात इस की दलील हे के क़ुरबानी तीन दिन हे वाला कोल ही राझे और सही हे | इस सारी तहकीक का खुलासा ये हे के नबी  صلاله عليه وسلم से शराहतन कुछ भी साबित  नहीं हे और आसार में इख्तिलाफ हे लेकिन स्य्येदना अली रदिअल्लहु अन्हु और जमूर सहबा किराम का यही कोल हे के क़ुरबानी तीन दिन ( ईद उल अजहा और दो दिन बाद) हे | हमारी तहकीक में यही सही हे और इमाम मालिक वगेरा ने भी इसे ही को  तरजीह दी हे  वल्लाहु आलम |


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